
बिहार भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता और अल्पसंख्यक समाज के प्रमुख चेहरे तुफैल खान कादरी (Tufail Khan Qadri) की भाजपा के साथ जीवन यात्रा समर्पण, सांगठनिक निष्ठा और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की कहानी है। वे बिहार में भाजपा के उन गिने-चुने मुस्लिम नेताओं में से हैं जिन्होंने जमीनी स्तर से उठकर पार्टी में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

उनकी अब तक की जीवन यात्रा और भाजपा के साथ उनके सफर के मुख्य पड़ाव निम्नलिखित हैं:

1. आरएसएस (RSS) और राष्ट्रवाद से शुरुआत
तुफैल खान कादरी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक के रूप में की थी। मुस्लिम समुदाय से आने के बावजूद ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ के सिद्धांत को मानते हुए वे संघ की विचारधारा से जुड़े और इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष
वे लंबे समय तक बिहार भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष (State President, Minority Morcha) रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बिहार के मुस्लिम समुदाय के बीच भाजपा की नीतियों, खासकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को जमीनी स्तर पर पहुंचाने का काम किया। उन्होंने विभिन्न जनसभाओं और दौरों के माध्यम से अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3. संगठन में मजबूत पकड़ और बड़े पदों का दायित्व
कादरी केवल अल्पसंख्यक मोर्चे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बिहार भाजपा के मुख्य संगठन में भी एक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता और मुखर नेता के रूप में उभरे।

• राष्ट्रीय मुद्दों जैसे CAA और NRC के समय जब विपक्ष सरकार को घेर रहा था, तब तुफैल खान कादरी ने खुलकर भाजपा और केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया और मुस्लिम समाज के भ्रम को दूर करने का प्रयास किया।
• वे पार्टी के बड़े नेताओं जैसे सम्राट चौधरी, संजय सरावगी और

नित्यानंद राय के साथ मिलकर बिहार में संगठनात्मक बैठकों और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सक्रिय रहते हैं।
4. बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य (वर्तमान जिम्मेदारी)
उनकी इसी निष्ठा और सांगठनिक क्षमता को देखते हुए बिहार सरकार में उन्हें बिहार राज्य अल्पसंख्यक कल्याण आयोग का सदस्य (Member of Bihar State Minority Commission) नियुक्त किया गया। इस संवैधानिक/सरकारी पद पर रहते हुए वे वर्तमान में पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं (जैसे हाल ही में उनका जगदीशपुर और खगड़िया का दौरा काफी चर्चा में रहा)। वे आयोग के माध्यम से अल्पसंख्यक समाज की समस्याओं को सुलझाने और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को उन तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं।

उनकी कार्यशैली की मुख्य विशेषताएं:
• विपक्ष पर मुखर प्रहार: वे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने अल्पसंख्यकों का सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, जबकि मोदी सरकार उनके वास्तविक विकास के लिए काम कर रही है।

• राष्ट्रवादी दृष्टिकोण: उनके सोशल मीडिया और भाषणों में हमेशा “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम्” के संकल्प के साथ अखंड भारत का सपना प्राथमिकता पर रहता है।

संक्षेप में, तुफैल खान कादरी की जीवन यात्रा एक आरएसएस स्वयंसेवक से शुरू होकर बिहार भाजपा के एक शीर्ष अल्पसंख्यक चेहरे और सरकार में आयोग के सदस्य बनने तक की है, जो बिहार की राजनीति में भाजपा के ‘समावेशी राष्ट्रवाद’ के प्रतीक के रूप में काम कर रहे हैं।

लेखक:-नवाब अली भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा कार्यकर्ता




