फोटोग्राफी : बेजोड़ हुनर के साथ व्यवसायिक भी
विश्व फोटोग्राफी दिवस 19 अगस्त पर विशेष आलेख

फोटोग्राफी : बेजोड़ हुनर के साथ व्यवसायिक भी
विश्व फोटोग्राफी दिवस 19 अगस्त पर विशेष आलेख
रोजनामा इंडो गल्फ़
वरिष्ठ संवाददाता एनाएतुल्लाह नन्हे
फोटोग्राफी एक नायाब कला है, यह अनमोल कला बेजोड़ हुनर के साथ-साथ व्यवसायिक भी है। आज अच्छे फोटोग्राफर मल्टी इंटरनेशनल इमेज कम्पनी से जुड़ कर लाखों कमा रहे हैं। आज सबके हाँथ में कैमरा वाला मोबाईल है। जिससे लोग हर समय एक-एक पल को यादगार बना रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए चित्र एवं चलचित्र के जरिए इतिहास को सजों रहे हैं। लेकिन जिस दौर में गिने चुने लोगों के पास फोटो कैमरा होता था, उनके द्वारा खींची गई तस्वीर इतिहास के पन्नों से निकाला जाता है तो एक-एक तस्वीर सैकड़ों हजारों शब्दों पर भारी पड़ती नजर आती है। जो लिख नहीं सकते हैं वह अपने कैमरे के लेंस से तस्वीरें उतार कर बहुत कुछ बयान कर देते हैं। सही कहा जाता है कि तस्वीरें बोलती हैं। जी बिल्कुल बोलती हैं और अतीत को वर्तमान में शोध करने पर विवश कर देती हैं। आज हम इस लेख में फोटोग्राफी की चर्चा इसलिए कर रहे हैं कि आज ही के दिन आज से लगभग दो सदी पूर्व यानी 187 साल पहले फोटोग्राफी की शुरुआत हुई थी। वैसे तो डॉगोरोटाइप तकनीक के माध्यम से फोटोग्राफी की पहली शुरुआत तो 09 जनवरी 1839 ई. को ही हो गई थी। लेकिन आविष्कार के लगभग 07 महीना बाद यानी 19 अगस्त 1839 को फ्रांस ने इसकी विधिवत घोषणा की। उनके दो वैज्ञानिक लुइस डॉगेर और जोसेफ नाइसफोर ने मिल कर आविष्कार किया था। जबकि उससे पहले फोटोग्राफी की प्रक्रिया की नींव खाड़ी देश इराक के बसरा शहर के रहने वाले एक मुस्लिम फोटोग्राफर जो कि इस्लामिक स्कॉलर भी थे इब्न अल हेथम (अल हजेन) ने रखी। जिन्होंने टेलीस्कोप (ऑप्टिक्स) के मैदान में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देते हुए कैमरा के शुरुआती सिद्धांतों को समझने में मदद की थी। उन्होंने ही लेंस और फोटो के लिए इस्तेमाल होने वाले फोटो प्लेट का आविष्कार किया था। उन्होंने ही दुनिया का पहला ऑब्स्क्यूरा कैमरा बनाया जिसे पिनहोल कैमरा भी कहा जाता है । हाँलाकि इब्न अल हेथम ने उस कैमरे से एक भी तस्वीर नहीं ली थी, लेकिन उनके प्रकाशिकी (ऑप्टिक्स) के सिद्धान्त ने ही फोटोग्राफी के मार्ग को प्रशस्त करते हुए आधुनिक कैमरे के सिद्धांतों की नींव रखी, जिसके बिना आज की फोटोग्राफी सम्भव नही हो सकती थी। उनके बाद के विज्ञानिकों ने उनके ही सिद्धान्त को आगे बढ़ाते हुए फोटोग्रफी के क्षेत्र में क्रांति लाई। आधिकारिक तौर पर विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाने की शुरुआत आज से 16 साल पहले आज ही के दिन 2010 में आस्ट्रेलिया के फोटोग्राफरों ने मिल कर की थी। जिसका उद्देश्य फोटाग्राफी को बढ़ावा देने के साथ उसमें नई तकनीक को लाने और विश्व के फोटोग्राफरों को उनके फोटो और उनकी फोटो कला को प्रोत्साहित करना है। इस दिन पूरे विश्व मे ऑन लाईन और ऑफलाइन फोटोग्राफी की प्रतियोगिता होती है। जिसमे अद्भुत फोटो के चयन के बाद फोटोग्राफर को सम्मानित किया जाता है। जब फोटोग्राफी की बात निकल चुकी है तो हम उसके इतिहास को जानने के अलावा हम आप को फोटोग्राफी की वह ट्रिक बताएंगे जो आप को एक बेहतरिन फोटोग्राफर बना सकती है। मैं बिहार राज्य के सीवान जिला का रहने वाला एनाएतुल्लाह नन्हे अपने 35 साल के फोटोग्राफी अनुभव को साझा कर रहा हूँ। सबसे पहले यह बताते चलूं की फोटो खींचना कोई आसान काम नही है। भले ही आप अपने मोबाईल के कैमरे से एक ही दृश्य को सैकड़ों फोटो शूट करें लेकिन वह फोटोग्राफी नही हुई। फोटोग्राफी या छायांकन का मतलब है कि एक फोटो क्लिक और वह ओके हो जाए। अगर नही तो फिर वह फोटोग्राफी नही है। फोटोग्राफी का मतलब केवल जैसे तैसे फोटो खिंचना नही है बल्कि कम्पोजिंग, फ्रेमिंग और टाईमिंग मायने रखता है। साथ ही जो सबसे बड़ी बात है वह यह है की हर जगह फोटो लेने में लाईट एंड सेड एक समान नही रहता है। कभी कभी सब्जेक्ट पर अपोजिट लाईट या सीधे बाउंस लाईट मिलती है। जिस कारण बहुत सारे लोग ऐसे ही फोटो शूट कर देते हैं जिस कारण फोटो किसी काम का नही रहता है जबकि एक मझे हुए पेशेवर (प्रोफेशनल) फोटोग्राफर की भांति आप को थोड़ा जगह परिवर्तन करते हुए आड़ा तिरछा एंगल लेकर या फिर हाईपावर बाउंस फ्लैश का इस्तेमाल अपने कैमरे में करना होगा। फोटोग्राफी के फील्ड में कामयाब फोटो के लिए सबसे अच्छा फॉर्मूला सब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। फोटो में केवल सब्जेक्ट को ही फोकस नही रखना है बल्कि उसके आस-पास के ऑब्जेक्ट को भी बैलेंस बना कर चलना होगा। भले ही आज डिजिटल दौर में कोई भी मोबाईल कैमरा या डिजिटल कैमरा से ऑटो लगाकर फोटो शूट कर रहा है। जबकि जिस दौर में एसएलआर कैमरा होता था उसे मैनुअल चलाना पड़ता था। उस मे लेंस को मिलाने के लिए सरसो के दाने से भी सूक्ष्म पॉइंट को मिलाना पड़ता था। अगर वह नही मिल पाता तो फोटो धुंधला, फॉगी या हिला हुआ प्रतीत होता था। उस दौर में उसे चलाने के लिए वर्षों लग जाते थे तब जाकर कोई सफल फोटोग्राफर बनता था । आज कल देखा जा रहा है अधिकतर लोग अपने मोबाईल के कैमरे या फिर डिजिटल कैमरे से फोटो लेते समय जूम का इस्तेमाल करते हैं जबकि जूम से फोटो की क्वालिटी अर्थात रिजुलेशन खत्म हो जाता है। फोटो शूट करते समय कोशिश ये होनी चाहिए कि जिस सबजेक्ट की आप तस्वीर उतार रहें हैं वहाँ बगैर जूम के खुद आगे-पीछे होकर फ्रेमिंग करें । अगर बहुत महत्पूर्ण दृश्य है और किसी कारणवश वहाँ नजदीक तक नही पहुँच सकते हैं तो ही जूम का इस्तेमाल करें। साथ ही हर फोटो क्लिक पर जूम के साथ हों या बगैर जूम के फोटो क्लिक के समय सेकण्ड के सौवे भाग पर सटर गिरता है उसी स्पीड के हिसाब से अपनी साँसों को रोकते हुए फोटो लें। अगर आप आउटडोर में फोटोग्राफी कर रहे हैं तो अपने कैमरे में एक्स्ट्रा लेंस हुड का प्रयोग जरूर करें। कई बार फोटो में सब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट का कलर एक जैसा ही रहता है। टेंट का कलर लाल या गुलाबी होने के कारण सब एक ही कलर में दिखते हैं और फोटो किसी काम का नही होता है। अच्छी फोटो के लिए ऐसी जगह पर सब्जेक्ट का क्लोजअप फोटो ही लें, ज्यादा दूर से लेने पर तस्वीर में लालिमा ज्यादा दिखेगा । ऐसा मामला दिन में ज्यादा धूप के कारण होता है । इसलिए फोटो लेते समय दिन में भी हेबी रेंज के टी.टी.एल. या एच.एस.एस. फ्लैश इस्तेमाल कीजिए । अगर एसएलआर यूज कर रहे हैं तो लालिमा को काटने के लिए हरा या नीला एक्सटर्नल फिल्टर लगाएं जो लाल रंग को कम करेगा । जब बात फोटाग्राफी की निकल गई है तो उसके इतिहास को जानना बहुत जरूरी हो जाता है। फोटो या फिल्म स्वेत-श्याम (ब्लैक एंड वाईट) से शुरु होते हुए गेवा कलर, शोव कलर, फूजी कलर, ईस्टमैन कलर, डीलक्स कलर, वार्नर कलर, मेट्रो कलर, सिने कलर, किनेमा कलर, क्रोमोजेनिक कलर होते हुए आज पूरी तरह डिजिटल हो गई है। पहले फोटोग्राफी के लिए फिल्म का रोल लगता था जिसे फोटो खींचने के बाद फ़िल्म को लैब में धूल कर निगेटिव बनाई जाती थी। उस दौर में रोल भी 110 एम एम, 120 एम एम और फिर 35 एम एम पर जाकर रुका ही था की डिजिटल कैमरे ने मेमोरी की जगह ले ली। जिस दौर में श्वेत-श्याम फोटो बनते थे उस समय कैमरे के रोल को डार्क रूम (पुरी तरह से अंधेरा कमरा) में समय के अनुमान से धुला जाता था फिर उस रोल से बने निगेटिव से रेड रूम (उसी डार्क रूम में हल्की रौशनी वाला लाल कलर का बल्ब जलता था ) में फोटो बनाया जाता था। जो कि काफी भारी प्रोसेस था। अगर किसी फिल्म के रोल को धुलते समय ज्यादा काला हो गया तो उससे फोटो नही बन सकती थी तो उस निगेटिव को दुनिया के सबसे खतरनाक जहर सनाईड के घोल में फिर से धुलना पड़ता था तब जाकर वह कामयाब हो पाता था। इस तरह का मामला स्टुडियो में खिंचे गए फोटो के साथ नही होता था बल्कि आउटडोर में खिंचे गए फोटो में लेंस का आपर्चर ज्यादा खुलने के वजह से हो जाता था । अब बात करते हैं कि फोटोग्राफी कितने प्रकार की होती है जिसमे कैरियर बनाया जा सकता है। इस फील्ड में सबसे पहले कमर्शियल फोटोग्राफर होते हैं जिन्हें प्रोफेशनल भी कहते हैं, जो स्टूडियो के साथ पोट्रेट फोटो सहित आउटडोर में मैरेज इवेंट को कवर करते हैं। उसके बाद मीडिया सेक्टर से जुड़े प्रेस फोटोग्राफर, फैशन फोटोग्राफर, लैंडस्केप फोटोग्राफर, वाईल्ड लाइफ फोटोग्राफर, हैरिटेज फोटग्राफर, दस्तावेजी माइक्रो फोटोग्राफर आदि बन सकते हैं। डिजिटल दौर में फोटोशॉप के जरिए फोटो पर धड़ल्ले से काम हो रहा है। हर कोई इसके प्रयोग कर महान बन रहा है लेकिन फोटोशॉप कला नहीं है क्योंकि जो भी आप फोटोशॉप पर कर रहे हैं वह किसी भी ओरिजनल फोटो पर ही कर रहे हैं। इसलिए जो आप फोटो ले रहे हैं वही असली कला है। इसलिए उसमें निखार के लिए आप को फोटोग्राफी की इंसाक्लोपीडिया को पढ़ना होगा। आज ए.आई. का दौर है अर्थात आर्टिफिसिल इंटिलिजेंस, जिसके माध्यम से वर्तमान की तस्वीर को अतीत और भविष्य में कैसा होगा दिखाया जा रहा है और अतीत की तस्वीर को वर्तमान में कैसी सकल होगी बताया जा रहा है। यहाँ हम बताते चलें कि ए.आई. के जरिए ज्यादातर गलत उपयोग किया जा रहा है। जो कि फोटोग्राफी का कतई हिस्सा नहीं है। जिस चीज में काल्पनिक सोंच के साथ बनावट हो वह फोटो या फोटोग्राफी का हिस्सा हो ही नही सकता, वह केवल मनोरंजन की वस्तु हो सकती है। फोटोग्राफी से व्यवसायिक फायदा उठाने के लिए कहीं भी रहकर अपनी कला के माध्यम से पूरे विश्व में अपनी पहचान के साथ पैसा कमाने के लिए ऑनलाइन बहुत सारे प्लेटफार्म हैं। ईमेजेज नाम की दर्जनों संस्था आज पूरे विश्व में छाई हुई है। जिसमें शौकिया फोटोग्राफर भी उससे जुड़ कर पैसा के साथ-साथ नाम भी कमा सकते हैं। वैसे फोटोग्राफी के फील्ड में विश्व स्तर पर सटर स्टॉक, आई स्टॉक, एडॉब स्टॉक, गैटी ईमेजेज, आलमी, ड्रीम टाइम्स, 500 पीएक्स, 123 आर एफ, पॉण्ड 5, डिपॉजिट फोटो, फीपिक, आई ई एम, फॉब एबी, वेसीटीजी आदि हैं। जो व्यपारियों, कारपोरेट, विज्ञापन एजेंसियों और आम लोगों को फोटो उपलब्ध कराने का काम करती हैं। जिसकी वे काफी मोटी कीमत वसूल करते हैं। वैसे मझे हुए फोटोग्राफर को फोटो स्टॉक एजेंसी से जुड़ कर पैसा और नाम कमाने के साथ-साथ ग्लोबल लेबल पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
📞 9570404656 &
@ enayatsv@gmail.com



