✊ 52वां शहादत दिवस समारोह में इश्तियाक अहमद की बुलंद आवाज
सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था में न्यायपूर्ण भागीदारी चाहिए

✊ 52वां शहादत दिवस समारोह में इश्तियाक अहमद की बुलंद आवाज,
“सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था में न्यायपूर्ण भागीदारी चाहिए”
जय जगदेव! जय भीम! जय जगदेव सेना!
नीमचक, बेलागंज, गया में आयोजित 52वें शहादत दिवस समारोह में जब शहीद जगदेव सेना के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव मो. इश्तियाक अहमद जी को सभा संबोधित करने का अवसर मिला, तो उन्होंने सबसे पहले अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
इसके बाद उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
बाबू जगदेव प्रसाद केवल एक व्यक्ति नहीं, सामाजिक परिवर्तन की विचारधारा थे।
उनकी लड़ाई किसी एक जाति या एक समुदाय की सत्ता के लिए नहीं थी। उनकी लड़ाई उस व्यवस्था के विरुद्ध थी जिसमें बहुसंख्यक मेहनतकश, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी, गरीब और वंचित समाज को उसकी जनसंख्या और श्रम के अनुरूप सम्मान, अवसर और भागीदारी नहीं मिलती थी।
जगदेव बाबू का प्रसिद्ध नारा आज भी व्यवस्था से सवाल करता है—
“सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है।
धन, धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है।”
इस नारे का अर्थ किसी के अधिकार को छीनना नहीं है। इसका अर्थ है—जनसंख्या, श्रम, योग्यता और सामाजिक न्याय के अनुरूप सबको अवसर और भागीदारी मिलनी चाहिए।
🌺 लालू प्रसाद यादव के दौर पर विचार
इश्तियाक अहमद जी ने अपने संबोधन में बिहार की पिछली राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के दौर में सामाजिक और राजनीतिक चेतना के स्तर पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। पिछड़े और वंचित समाज के अनेक लोगों में राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ा और सत्ता के दरवाजे तक पहुँचने की चेतना मजबूत हुई।
लेकिन उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि केवल सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है।
यदि सत्ता और राजनीति परिवारवाद, सीमित नेतृत्व या कुछ व्यक्तियों तक केंद्रित हो जाए तथा शिक्षा, रोजगार, उद्योग, कानून-व्यवस्था और व्यापक आर्थिक विकास की गति अपेक्षित स्तर तक न पहुँचे, तो सामाजिक न्याय का लक्ष्य अधूरा रह जाता है।
जाति का आत्मसम्मान जरूरी है, लेकिन समाज का आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान उससे भी जरूरी है।
इसीलिए किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल नारों से नहीं बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि—
कितने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली,
कितने युवाओं को रोजगार मिला,
गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति कितनी बदली,
समाज के वंचित वर्गों को संस्थाओं में कितनी वास्तविक भागीदारी मिली।
🌿 नीतीश कुमार के शासन पर भी सवाल
अपने संबोधन में इश्तियाक अहमद जी ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल में बिहार में सड़क, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन हुए। सुशासन की अवधारणा को बिहार की राजनीति में प्रमुखता मिली।
लेकिन जगदेव बाबू की विचारधारा के समर्थकों के सामने आज भी एक बड़ा प्रश्न खड़ा है—
क्या बहुसंख्यक शोषित-वंचित समाज को उसकी वास्तविक हिस्सेदारी मिली?
यदि समाज की बड़ी आबादी दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक, गरीब और मेहनतकश वर्गों से बनी है, तो उनकी भागीदारी केवल चुनाव में वोट देने तक सीमित क्यों रहे?
इश्तियाक अहमद जी ने इसी प्रश्न को जोर देकर उठाया कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ केवल विधायक और मंत्री बनने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
भागीदारी का सवाल हर क्षेत्र में उठना चाहिए—
✔️ सरकारी संस्थानों में
✔️ प्रशासनिक सेवाओं में
✔️ शिक्षा और उच्च शिक्षा में
✔️ रोजगार में
✔️ उद्योग और व्यापार में
✔️ सरकारी योजनाओं के लाभ में
✔️ ठेकेदारी और आर्थिक अवसरों में
✔️ निजी क्षेत्र में अवसरों की समानता में
✔️ नीति निर्माण की संस्थाओं में
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू की 90 प्रतिशत की अवधारणा को आज के संवैधानिक लोकतंत्र में समान अवसर, सामाजिक न्याय और व्यापक भागीदारी के प्रश्न के रूप में समझना होगा।
✊ “वोट हमारा, राज में हिस्सा भी हमारा”
सभा में उठी भावना स्पष्ट थी कि लोकतंत्र में जनता केवल चुनाव के दिन मतदान करने वाली भीड़ नहीं है।
जिस समाज का वोट है, उस समाज के बच्चों को शिक्षा चाहिए।
जिस समाज का श्रम है, उसे रोजगार चाहिए।
जिस समाज के नाम पर राजनीति होती है, उसे नीति निर्माण में भागीदारी चाहिए।
और जिस समाज की आबादी बड़ी है, उसे सम्मान और अवसरों में भी न्यायपूर्ण हिस्सा मिलना चाहिए।
यही जगदेव बाबू के संघर्ष की मूल चेतना थी।
🌺 इश्तियाक अहमद जी का संदेश—एकता ही शक्ति है
मो. इश्तियाक अहमद जी ने अपने संबोधन के माध्यम से यह संदेश दिया कि शोषित-वंचित समाज की लड़ाई जाति के आधार पर एक-दूसरे से लड़ने की नहीं, बल्कि शिक्षा, संगठन, सामाजिक चेतना और संवैधानिक अधिकारों के माध्यम से एकजुट होने की लड़ाई है।
दलित-पिछड़ा-अति पिछड़ा-आदिवासी-अल्पसंख्यक और सभी गरीब मेहनतकश समुदायों को यह समझना होगा कि—
आपसी संघर्ष से कोई मजबूत नहीं होगा।
आपसी सम्मान, भाईचारे और संगठन से ही समाज मजबूत होगा।
आज जरूरत किसी व्यक्ति विशेष की जय-जयकार से अधिक विचारों की एकता की है।
आज जरूरत केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि नीतियों और अवसरों में वास्तविक सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की है।
🔥 जगदेव बाबू की शहादत का संदेश
बाबू जगदेव प्रसाद जी ने अपने जीवन और संघर्ष से यह संदेश दिया कि—
अन्याय के सामने चुप मत रहो।
अंधविश्वास और पाखंड के सामने विवेक का दीप जलाओ।
शोषण के सामने संगठन खड़ा करो।
और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संघर्ष करो।
उनकी शहादत हमें यह भी याद दिलाती है कि कोई भी विचार केवल स्मारक बनाने से जीवित नहीं रहता।
विचार तब जीवित रहता है जब उसे समाज के जीवन में उतारा जाए।
आज बेलागंज की धरती पर आयोजित यह 52वां शहादत दिवस समारोह केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस अधूरे सामाजिक प्रश्न को फिर से उठाने का अवसर है—
क्या भारत और बिहार की बहुसंख्यक मेहनतकश जनता को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति, संस्थाओं और सत्ता में न्यायपूर्ण भागीदारी मिल रही है?
इस प्रश्न का उत्तर खोजने और उसके लिए लोकतांत्रिक संघर्ष करने की प्रेरणा ही जगदेव बाबू की सच्ची विरासत है।
मो. इश्तियाक अहमद जी ने इसी विचार को अपने संबोधन में मजबूती से रखते हुए कहा कि सामाजिक न्याय का संघर्ष किसी सरकार या किसी दल के प्रति व्यक्तिगत विरोध का नाम नहीं है।
बल्कि यह एक निरंतर लोकतांत्रिक संघर्ष है—
जहाँ जो सरकार अच्छा करे, उसका समर्थन किया जाए।
जहाँ कमी हो, वहाँ सवाल पूछा जाए।
और जहाँ बहुसंख्यक समाज के अधिकारों की अनदेखी हो, वहाँ संविधान और लोकतंत्र के दायरे में आवाज उठाई जाए।
✊ हमारा संकल्प
आइए, अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद जी के 52वें शहादत दिवस पर संकल्प लें—
हम समाज को अंधविश्वास से मुक्त करेंगे।
हम शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएंगे।
हम जातीय घृणा नहीं, सामाजिक न्याय और भाईचारा बढ़ाएंगे।
हम किसी भी व्यक्ति या दल की अंधभक्ति नहीं करेंगे।
हम हर सरकार से समान अवसर और न्यायपूर्ण भागीदारी की मांग करेंगे।
और हम जगदेव बाबू के सपनों के समाज के निर्माण के लिए संगठित रहेंगे।
सिर्फ सत्ता में चेहरा बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती—
व्यवस्था तब बदलती है, जब समाज जागता है, संगठित होता है और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहता है।
🌺 अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद जी को शत-शत नमन!
🌺 उनकी शहादत और विचारों को क्रांतिकारी सलाम!
जय जगदेव!
जय भीम!
जय जगदेव सेना! ✊
मो इश्तियाक अहमद राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, शहीद जगदेव सेना




