जनवादी लेखक संघ सिवान के तत्वाधान में हिंदी पखवाड़ा,
जनवादी लेखक संघ सीवान के तत्वावधान में "हिंदी पखवाड़ा"

जनवादी लेखक संघ सिवान के तत्वाधान में हिंदी पखवाड़ा,
विशेष संवाददाता:- रोजनामा इंडो गल्फ(डिजिटल मंच)

जनवादी लेखक संघ सीवान के तत्वावधान में “हिंदी पखवाड़ा” के अवसर पर स्थानीय कन्हैया लाल केन्द्रीय जिला पुस्तकालय के सभागार में विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ सीवान के जिला अध्यक्ष वरिष्ठ उस्ताद शायर कमर सीवानी ने की।
इस अवसर पर जेड ए इस्लामिया कालेज के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान प्रो (डॉ) हारुन शैलेन्द्र को सम्मान – पत्र,शाल, पुष्प माला से सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में विचार रखते हुए युगल किशोर दूबे ने कहा कि हिंदी पूरे देश की भाषा है। हिंदी को किसी एक सांचे में नहीं रखा जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसने जनजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रो महमूद हसन अंसारी ने कहा कि हिंदी और उर्दू सगी बहनें हैं ।भले ही लिपि अलग है किन्तु विचार के स्तर पर दोनों एक हैं। डॉ के एहतेशाम ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी को केवल साहित्यकारों के भरोसे छोड़ दिया गया है। प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षेत्र में हिंदी की काफी उपेक्षा हुई है जबकि फिल्में, कलाकारों ने इसे जन-जन तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया है। प्रो उपेन्द्र नाथ यादव ने कहा कि आज देश में ९४ हजार सरकारी विद्यालय बंद कर दिया गया है वहीं अंग्रेजी माध्यम की प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ आ गई है। ऐसे में शासकों का दोहरा चरित्र हिंदी के लिए घातक है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में युवा शायर ग़ुलाम हैदर वारसी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ टी के शुकला ने हिंदी हमारी अरमान बन गयी है सराही गई। प्रसिद्ध कवयित्री विजय लक्ष्मी विनोदिनी ने उच्च स्तरीय कविता का सस्वर पाठ किया।कमर सीवानी ने समां बांध दिया वो कौन शख्स है जो दस्ते जुल्मते ग़म में मोसररतो का समंदर तलाश करता है। अरशद अली अधिवक्ता ने गांधी जी को याद करते हुए पढ़ा कि वतन की शान थे तहजीब की अमानत थे हमारे गांधी जी इंसानियत के अजमत थे। डॉ असगर अली ने सुनाया हम हिन्दी बोलने में शर्माते क्यों है। लाइची हरिराही का कलाम कि हे कलम आज चुप क्यों बैठी है कुछ तो बोलो खूब वाहवाही बटोरी। विक्रमा पंडित विवेकी ने देश की गरीबी पर कारुणिक कविता सुनाई। इस कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों साहित्यकारों में प्रमुख थे आदित्य कुमार विनोद,राम नरेश सिंह,पवन पांडेय, भोगेंद्र झा आदि।




