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पत्रकारिता की साख पर संकट: फेक न्यूज़, फर्जी प्रेस कार्ड, फर्जी पत्रकार बनकर गाड़ियों पर प्रेस लिखकर चलना, बगैर सत्यापन की खबरें, केंद्र सरकार व राज्य सरकार को सख्त होने की जरूरत!

केंद्र सरकार व राज्य सरकार को सख्त होने की जरूरत!

पत्रकारिता की साख पर संकट: फेक न्यूज़, फर्जी प्रेस कार्ड, फर्जी पत्रकार बनकर गाड़ियों पर प्रेस लिखकर चलना, बगैर सत्यापन की खबरें, केंद्र सरकार व राज्य सरकार को सख्त होने की जरूरत!


डॉ सरवर जमाल (मुख्य संपादक) रोजनामा इंडो गल्फ, राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्रI

 

संपूर्ण भारत तथा खासकर बिहार में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बिना सत्यापन के खबरों के प्रसार ने न केवल पत्रकारिता की साख को प्रभावित किया है, बल्कि प्रशासन के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।

 

पूरे भारत तथा खासकर बिहार में इन दिनों यह देखा जा रहा है कि कई ऐसे लोग भी खुद को पत्रकार बताकर अपनी गाड़ियों पर प्रेस का लोगो लगाकर थानों और सरकारी कार्यालयों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं, जिनके पास न तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान का प्रमाण है और न ही वैध प्रेस पहचान पत्र। इसके अलावा, Facebook, YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर बिना पुष्टि के खबरें वायरल करना आम बात होती जा रही है।

 

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार तथा बिहार सरकार, सूचना प्रसारण विभाग बिहार को फेक न्यूज़ फैलाने और बिना प्रमाणिकता के खबर चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

 

डॉ सरवर जमाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और अपुष्ट खबरें फैलाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की आवश्यकता है, ताकि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे।“केवल वही व्यक्ति पत्रकारिता के कार्य के लिए अधिकृत माने जाएं, जिनके पास वैध प्रेस कार्ड, संबंधित संस्थान का प्राधिकृत पत्र, डीपीआरओ (जिला जनसंपर्क कार्यालय) या डीपीआईओ/सूचना विभाग से जारी मान्यता हो। इसके बिना कोई भी व्यक्ति पत्रकार के रूप में सरकारी कार्यालय या थाना परिसर में प्रवेश कर सूचना संकलन नहीं कर सकता इस पर विशेष ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है|

श्री जमाल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना वैध पहचान और अनुमति के खुद को पत्रकार बताकर खबरों का संकलन या प्रसारण करता है, तो उसके खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

 

हिंदुस्तान के अन्य राज्यों तथा बिहार राज्य के मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे सभी नियमों का पालन करते हुए पत्रकारिता कर रहे हैं, लेकिन फर्जी पहचान वाले लोगों की वजह से उनकी छवि भी प्रभावित हो रही है।

 

हाल के दिनों में कुछ संवेदनशील घटनाओं की तस्वीरें और खबरें बिना सत्यापन के सोशल मीडिया पर वायरल की जाती रही है, जिससे न केवल संबंधित लोगों की गरिमा को ठेस पहुंचती है, बल्कि अफवाह फैलने की स्थिति भी बनी रहती है।

 

पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि पत्रकारिता एक जिम्मेदार पेशा है, जिसमें तथ्यों की पुष्टि और नैतिकता का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रशासन द्वारा सख्ती बरतना समय की मांग है।

अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार तथा बिहार सरकार सूचना प्रसारण विभाग बिहार इस दिशा में कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है और पत्रकारिता की साख को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। जिससे मान्यता प्राप्त पत्रकारों की इज्जत बची रहे और और सही खबरों का संकलन करने में कोई कठिनाई उत्पन्न ना हो |

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