
बांकीपुर उपचुनाव 2026: त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा भाजपा का ‘गढ़’, कौन किस पर भारी?
मोहम्मद राशिद अहमद
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बिहार की राजनीति का सबसे हॉटस्पॉट इस समय पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट (182)बनी हुई है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर 30 जुलाई 2026को उपचुनाव होना तय हुआ है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय हो चुका है।
सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और मैदान में उतरे उम्मीदवारों की प्रोफाइल इस मुकाबले को बेहद कांटे का बना रही है। आइए विश्लेषण करते हैं कि इस चुनावी बिसात पर किसका पलड़ा कितना भारी है:
नीरज कुमार सिन्हा (परंपरागत गढ़ और सांगठनिक मजबूती)
भाजपा ने अंतिम समय में रणनीति बदलते हुए अपने पुराने जमीनी कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है।
बांकीपुर सीट को पारंपरिक रूप से भाजपा का सबसे सुरक्षित किला माना जाता है। नितिन नवीन यहां से लगातार 5 बार विधायक रहे और उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने 4 बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। नीरज सिन्हा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के बूथ स्तर से उठे नेता हैं, जिन्हें स्थानीय कैडर का मजबूत समर्थन प्राप्त है।
बांकीपुर सीट पर कायस्थ और वैश्य मतदाताओं की बड़ी आबादी है। नीरज कुमार सिन्हा की कायस्थ पृष्ठभूमि और उनके परिवार का जनसंघ कालीन जुड़ाव भाजपा के कोर वोटर को एकजुट रखने में सबसे बड़ा फैक्टर है।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है, जो पिछले आम चुनाव में भी इस सीट से उपविजेता रही थीं।
रेखा गुप्ता ने पिछले चुनाव में हार के बावजूद 46,000 से अधिक वोट हासिल किए थे, जिससे उनका जमीनी संपर्क साबित होता है। उन्हें राजद के पारंपरिक ‘एमवाई’ (MY) समीकरण के साथ-साथ महागठबंधन के अन्य दलों का भी समर्थन प्राप्त है।
रेखा गुप्ता वैश्य समाज (तेली जाति) से आती हैं। बांकीपुर में वैश्य मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। अगर वह भाजपा के वैश्य वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रहती हैं, तो वह मुकाबले को पलट सकती हैं।
प्रशांत किशोर (बदलाव की लहर और व्यक्तिगत करिश्मा)
इस उपचुनाव का सबसे बड़ा सरप्राइज जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर का खुद चुनावी मैदान में उतरना है। उनकी एंट्री ने इस मुकाबले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
प्रशांत किशोर के पास चुनावी रणनीतियों का लंबा अनुभव है। वह युवाओं, व्यवस्था से नाराज मतदाताओं और ‘बदलाव’ चाहने वाले साइलेंट वोटर्स को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। उनका अभियान सीधे जनता से जुड़ाव और विकास के एजेंडे पर आधारित है।
एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पीके सीधे तौर पर भाजपा और राजद दोनों के शहरी वोट बैंक को प्रभावित कर रहे हैं। वह पारंपरिक समीकरणों को तोड़कर इस चुनाव को त्रिकोणीय बना चुके हैं।
बांकीपुर से तेजप्रताप की कैंडिडेट वीणा मानवी का नॉमिनेशन रद्द. सोमवार को नॉमिनेशन करने के बाद पटना पुलिस ने उन्हें धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बाद में कोर्ट से जमानत मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया था
यदि वर्तमान राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों का विश्लेषण करें, तो पलड़ा अभी भी पारंपरिक रूप से भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा का भारी नजर आता है जिसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
पिछले तीन दशकों से इस सीट पर भाजपा को हराना किसी भी दल के लिए नामुमकिन साबित हुआ है। शहरी क्षेत्र होने के कारण यहां भाजपा का सांगठनिक ढांचा बेहद मजबूत है।
प्रशांत किशोर (जनसुराज) और रेखा गुप्ता (राजद) के मैदान में होने से सत्ता विरोधी (Anti-Incumbency) वोटों का बिखराव होना तय है, जिसका सीधा फायदा अंततः भाजपा को मिल सकता है।
हालांकि गणितीय रूप से भाजपा आगे दिख रही है, लेकिन बांकीपुर का यह उपचुनाव एकतरफा बिल्कुल नहीं है। यदि प्रशांत किशोर युवाओं और साइलेंट वोटर्स को बूथ तक लाने में सफल रहे या रेखा गुप्ता ने वैश्य वोटों में बड़ी सेंधमारी कर दी, तो नतीजों में बड़ा उलटफेर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल यह मुकाबला बिहार के आगामी राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित होगा।




