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03 मई- विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस : अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व को रेखांकित करता यह दिन

03 मई- विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस : अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व को रेखांकित करता यह दिन

 

रोजनामा इंडो गल्फ़, एनाएतुल्लाह नन्हे

 

प्रेस यानी मीडिया और उसमें काम करने वाले सभी कर्मी अर्थात पत्रकार, छायाकार, डेस्क एडिटर, ऑपरेटर व अन्य कर्मचारी चाहे वह किसी भी पद पर हो दुनिया उसे जर्नलिस्ट, सहाफी और पत्रकार ही कहती है । चाहे वह छोटे से शहर से लेकर मेट्रो सिटी में काम करे या किसी विदेशी मीडिया में देश या देश से बाहर काम करते हैं लेकिन वह है तो पत्रकार ही । एक पत्रकार, छायाकार, रेडियो के लिए वॉइस रिकॉर्डर करने वाला आर जे सब के सब मीडिया कर्मी आम जनता तक देश-दुनिया की पल पल की खबरों से रूबरू कराते हैं । क्या कभी किसी आम आदमी ने ये विचार किया, मंथन किया कि एक खबर, फोटो, वीडियो फुटेज व स्टिंग क्लिप के लिए एक पत्रकार को कितने जोखिम उठाने पड़ते हैं । खबरों के संकलन में लिए जान को खतरे डाल कर खबर बनाते हैं । विशेषकर जब युद्ध का क्षेत्र हो, आतंकवादियों का अड्डा हो, तनावपूर्ण माहौल में अप्रत्यासित भीड़ हो, धार्मिक उन्माद हो या किसी भी धर्म या मजहब का जलसा-जुलूस, आखाडा, रैली हो, ऐसे में खबरें और फुटेज बनाना आसान नही होता है । फिर भी पत्रकार जान की बाजी लगा कर फुटेज, फोटो और खबरें बनाते हैं, और आम आदमी को दुनिया में घट रही घटनाओं से बा-खबर करते हैं । मीडिया के क्षेत्र में अप्रत्यासित डिजिटल क्रान्ति की वजह से मैदान-ए- जंग से सीधा (लाइव) प्रसारण भी कर रहे हैं । इस दौरान बहुत सारे जगहों पर पत्रकारों की जान तक भी चली जाती है और कहीं-कहीं तो निरंकुश सरकार पत्रकारों को खबरें छापने और दिखाने से नाराज होकर उन्हें गलत केस दर्ज कर जासूसी और देशद्रोही का आरोप लगा कर जेल में भी डाल चुकी है । विश्व के बहुत सारे देशों में इसका उदारहण मौजूद है । इन ही सब मामलों को लेकर ग्लोबल लेबल पर 03 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, ताकि अपनी जिंदगी को खतरे में डाल कर काम करने वाले पत्रकारों की आवाज को कोई ताकत दबा न सके । इसलिए की पत्रकार मीडिया के क्षेत्र में निर्भीक होकर पत्रकारिता कर सके और उन्हें सरकारी स्तर पर स्वतंत्रता मिले और कोई दबाव न हो उसके लिए दबाब समूह बनाया जाता है ताकि पत्रकारों की स्वत्रंता बहाल रहे । कारण की निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वतंत्रता मिलना बहुत ही जरूरी है । इसी उद्देश्य से हर साल 03 मई को दुनिया भर में ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ या ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे’ मनाया जाता है । फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन अर्थात अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का सम्मान करने, उनके कर्तव्यों को याद दिलाने और उसे बनाए रखने के लिए विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है । इसके लिए हर वर्ष बदल-बदल कर अलग-अलग देश मेजबानी करता है, जिसमे हर वर्ष एक थीम (कॉन्टेंट) दिया जाता है । जिस पर उस वर्ष के 365 दिन काम किया जाता है । विश्व के पत्रकारों की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्व का मुखिया संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की महासभा (जेनरल असेम्बली) में सन 1991 ई. को प्रस्ताव लाया गया था। जिसे दो वर्षों के बाद यूनेस्को के महासम्मेलन में सन 1993 ई. को पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए लाए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन विधवत रुप से उसे पूरे विश्व में सन 1994 ई. में 03 मई को विश्व प्रेस दिवस या विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया। जिसका उद्देश्य प्रेस की आजादी की अहमियत से दुनिया को रूबरू कराना है। इसका एक और खाश मकसद दुनिया भर की सरकारों को यह याद दिलाना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के लिए पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा और सम्मान करना है । गौरतलब है कि जनतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उनको बहाल करने में मीडिया बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसलिए सभी लोकतांत्रिक सरकारों को मीडिया हाउस एवं उससे जुड़े पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए । याद रहे की भारत में सन 1948 ई. के सार्वभौमिक मानवाधिकार अधिनियम के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करने और उसे बहाल रखने के साथ-साथ उनके कर्तव्यों को याद दिलाने के लिए ही यह दिवस मनाया जाता है । विगत दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानी 03 मई 2024 ई. को यूनेस्कों ने यह चिंता जताई थी कि इस वर्ष सबसे ज्यादा पत्रकारों की हत्या हुई है । जिस पर गहन चिंतन करने की जरूरत है क्योंकि जनतांत्रिक सरकार में मीडिया चौथे स्तम्ब के रूप में है, जिसका सबसे ज्यादा योगदान जनतंत्र की मजबूती के लिए है । इसलिए मीडिया हाउस से जुड़े पत्रकारों, फोटोग्राफरों, वीडियोग्राफरों, रेडियो से जुड़े आर जे, ऑडियो रिकॉर्डरों, टेक्नीशियनों एवं मीडिया हाउस के सहयोगियों को काम करने के क्रम में पूरी स्वतंत्रता उस देश की सरकार की ओर से मिलनी चाहिए । साथ ही साथ उनकी सुरक्षा की गारंटी भी उस देश की सरकार की प्रथम वरीयता क्रम में होनी चाहिए । मीडिया किसी का दुश्मन या दोस्त नही होता है बल्कि वह दोनों पक्षों की बात रखता है और जो हकीकत होता है वही आईना की माफिक दिखाता है । इसलिए तो मीडिया एवं प्रेस के ऊपर प्रसिद्ध शायर जमील मजहरी कहते हैं कि ‘न स्याही के हैं दुश्मन न सफेदी के हैं दोस्त, हमको आईना दिखाना है दिखा देते हैं’। यानी मीडिया और पत्रकार के ऊपर सरकार का दबाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि पत्रकार लोकतंत्र का प्रहरी होता है जो उस देश की संधीय ढाँचे को बैलेंस (सामंजस्य) बनाए रखता है ताकि सरकार निरंकुश नहीं हो जाए और अराजकता पर रोक लग सके । आज के परिवेश में विश्व स्तर पर भारत मीडिया में क्षेत्र में नई तकनीक के साथ काफी आगे है जिसकी पूरी दुनिया में एक अलग पहचान है। इसमे कोई दो राय नहीं की दूसरे देश के लोग अपने भारत देश की मीडिया तकनीक का नकल कर रहे हैं । मगर बहुत ही अफसोस के साथ यह भी लिखना पड़ रहा है कि दुनिया के 180 देशों में से भारत का मीडिया के रेंक में चहुत ही खराब पोजिशन है । आर.एस.एफ अर्थात रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने सन 2025 में जो सर्वे किया उसमें ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2025 में भारत को 151 वाँ स्थान मिला है । जबकि पिछले उससे पहले के वर्ष 2024 में 159 वाँ रेंक था । हाँलाकि रैंकिंग में 8 पॉइंट का सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी भारत अभी भी बहुत अच्छी पोजिशन में नही है, अभी भी रेड जोन में है, जो गम्भीर चिंतन की बात है । यानी काफी नीचे स्तर पर है जबकि सबसे छोटे और पड़ोसी देश बंगलादेश और नेपाल भारत के रैंक से काफी ऊपर हैं । गरीब और छोटा देश नेपाल आज के डेट में 90 वें रेंक में है यानी भारत से 61 पॉइंट ऊपर है । सरकार को इस तरह से मीडिया के ऊपर अंकुश नही लगाना चाहिए की विश्व में जग हसाई हो । कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि भारत सरकार को चाहिए की वह भारत की मीडिया का रैंक विश्व स्तर पर संतोषजनक हो उसके लिए मीडिया की स्वतंत्रता के जो मापदंड है उसके अनुसार उसे स्वतंत्रता जरूर दें । आज कल भारत और पश्चमी मीडिया का जो व्यंगात्मक नाम दिया जा रहा है, वह मीडिया समूह के लिए शुभ संकेत नहीं है । इसके लिए मीडिया समूह एवं सरकार दोनों को चिंतक करने की जरूरत है । विशेषकर मुख्यधारा की मीडिया यानी मेन स्ट्रीम मीडिया की स्वतंत्रता पर सरकारी नियंत्रण जनतंत्र के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि की आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया स्ट्रीम मीडिया से पहले बिना किसी सूत्र के ही खबर चला कर सनसनी फैला रही है । इस से भी मेन स्ट्रीम मीडिया की छवि पर कुप्रभाव पड़ रहा है । हांलाकि सोशल मीडिया को भारत की सर्वोच्च न्यायालय भले ही मीडिया नही मानती है, फिर भी इसके लिए सरकार और मीडिया समूह को आज 03 मई विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर अपने पत्रकारों के फ्रीडम ऑफ एक्स्प्रेशन के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है ।

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